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ॐ भूर्भुवः स्वः । तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ।।
गुरु ब्रह्मानंद जी की आरती
Guru Brahmanand Ji Ki Arti
ॐ
यह आरती भक्ति और एकता का संदेश देती है।प्रतिदिन इस आरती का पाठ करने से मन को शांति मिलती है।
ॐ तत्सत
गुरु ब्रह्मानंद जी की आरती का मधुर स्वरूप
काला (आकाश)
हरा (वायु)
लाल (अग्नि)
सफेद (वरुण)
पीला (भूमि)
।। पंचरंगे झंडे की प्रार्थना ।।
अखिल विश्व पंचरंगा प्यारा,
झण्डा उंचा रहे हमारा।
इस झण्डे के नीचे निर्भय, पांच तत्व का है जग सारा।।
झण्डा उंचा रहे हमारा।
इस झण्डे के नीचे निर्भय, पांच तत्व का है जग सारा।।
झण्डा उंचा रहे हमारा।
पीला रंग यह भूमि तत्व है, लोभ जमीं ने बढन का भारा।।
झण्डा उंचा रहे हमारा।
धोला रंग यह वरुण तत्व है, मोह भूत से हो निस्तारा ।।
झण्डा उंचा रहे हमारा।
लाल रंग यह अग्नि तत्व है, मध्य भूत का दिया इशारा।।
झण्डा उंचा रहे हमारा।
हरा रंग यह वायु तत्व है, काम भूत आनन्द लहरारा।।
झण्डा उंचा रहे हमारा।
काला रंग यह आकाश तत्व है, क्रोध भूत यह काल विचारा।।
झण्डा उंचा रहे हमारा।
पंचरंगा झण्डा पंचयाती, अखिल विश्व का है यह साथी।।
ब्रह्मानन्द विश्व मे है एक मतवाला,
ब्रह्मानन्द विश्व मे है एक मतवाला,
झण्डा उंचा रहे हमारा।
।। झण्डा उंचा रहे हमारा ।।
यह पंचरंगा झण्डा हमारा, सब मे मिला है किसी से न न्यारा।
आखिर मे यही होगा सहारा, बोलो साथियों पंचरंगा प्यारा।।
आखिर मे यही होगा सहारा, बोलो साथियों पंचरंगा प्यारा।।
विश्व को शांति देने वाला, धर्म की किश्ती खेने वाला।
छाया मे सबको लेने वाला, विश्व की ये आंखो का तारा।।
छाया मे सबको लेने वाला, विश्व की ये आंखो का तारा।।
गंगा यमुना की लहरो का, सब दरियाओं की मौजों का।
विश्व की जोश भरी फौजों का, इस झण्डे की तरफ इशारा ।।
विश्व की जोश भरी फौजों का, इस झण्डे की तरफ इशारा ।।
धर्म–अधर्म की जंग छिडी है, फौज हमारी तुली खडी है।
आगे बढने की यही घडी है, बढो लगाकर ओ३म् का नारा।।
आगे बढने की यही घडी है, बढो लगाकर ओ३म् का नारा।।
फूट को छोडो हाथ मिलाओ, सब झण्डे के साए मे आओ।
इसके नाम पर बलि बलि जाओ, ब्रह्मानन्द इसका रखवाला ।।
इसके नाम पर बलि बलि जाओ, ब्रह्मानन्द इसका रखवाला ।।
झण्डा उंचा रहे हमारा।।